
डंकी मार्ग से अमेरिका जाने का सपना देखने वाले तरनतारन के मंदीप सिंह के लिए यह सफर मौत से कम नहीं था। पाकिस्तानी डोंकर इब्राहिम के झांसे में आकर मंदीप ने 42 लाख रुपये गंवा दिए और नौ दिनों तक ऐसी यातनाएं झेलीं जिन्हें भुला पाना मुश्किल है। जानिए मंदीप की इस दर्दनाक यात्रा का सच।
तरनतारन। बाहरवीं की पढ़ाई के बाद इटली गए तरनतारन जिले के कस्बा चोहला साहिब निवासी मंदीप सिंह को पाकिस्तान से संबंधित इब्राहिम नामक डोंकर का संपर्क नंबर मिला। जिसने आश्वासन दिया कि मेक्सिको बॉर्डर के माध्यम से दो दिनों में ही अमेरिका भेज दिया जाएगा।
अमेरिकन डॉलरों की चमक की चकाचौंध में आकर मंदीप सिंह डोंकर के झांसे में आया, लेकिन अमेरिका पहुंचने में दो माह का समय लगा। नौ दिन ऐसे गुजारे, जो जीवन भर भूलने वाले नहीं।
कनपटी पर गन रखकर लगातार मारपीट की जाती रही। खाने के लिए भोजन तो दूर पानी तक भी नहीं दिया जाता था। टॉयलेट के होल से पानी पीकर नौ दिन गुजारे। जिसके बाद मेक्सिको बॉर्डर पार करते ही उसको अमेरिका की पुलिस ने काबू कर लिया
'अमेरिका जाना गलत फैसला'
तरनतारन जिले के कस्बा चोहला साहिब निवासी नोनिहाल सिंह अपने बेटे मंदीप सिंह को गले लगाकर एक तरफ उस घड़ी को कोस रहा था, जब उसने अपने बेटे को मेक्सिको के माध्यम से अमेरिका जाने की हामी भरी। दूसरी तरफ वाहेगुरु का शुकराना करता दिखाई दिया कि घर का चिराग आज कुशल-मंगल परिवार में पहुंच गया है।
मंदीप सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी डोंकर इब्राहिम ने विश्वास दिलाया था कि अमेरिका के चुनाव के नतीजे आने से पहले ही उसे बॉर्डर पार करवा दिया जाएगा, लेकिन एजेंट द्वारा उसको धोखे में रखकर लगातार पैसे मांगे जाते थे। मंदीप सिंह के गले से गोल्ड चेन, एप्पल फोन, पासपोर्ट व तीन हजार यूरो छीन लिए गए।
कनपटी पर गन रखकर किया प्रताड़ित
करीब दो माह तक मंदीप को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। यूपी से संबंधित एक व पाक से संबंधित एक अन्य युवक उसके साथ था। कनपटी पर गन रखकर नौ दिन लगातार मारपीट की जाती रही।
स्पेनिश भाषा में उसको यह कहा जाता था कि पाकिस्तानी डोंकर इब्राहीम ने साफ कहा है कि मेक्सिको बॉर्डर पार कर अमेरिका जाने वाले भारतीयों में से किसी एक को मार डालो।
फिर बाकी बचे लोग अपने स्वजनों से पैसे मंगवाने में देरी नहीं करेंगे। दैनिक जागरण को जानकारी देते मंदीप सिंह ने बताया कि मेक्सिको में बॉर्डर पार करने के लिए करीब आठ हजार भारतीय अब भी वहां फंसे हैं।
रोजगार बनी बड़ी समस्या
इटली से लेकर अमेरिका पहुंचने तक करीब 42 लाख रुपये उजाड़ चुके मंदीप सिंह ने बताया कि अगर पंजाब में रोजगार मिल जाता तो अपने रिश्तेदारों से कर्ज लेने की कोई जरूरत नहीं थी। उसके पिता नोनिहाल सिंह चार वर्ष तक दुबई में रहे, लेकिन वहां से भी इतनी आमदनी नहीं होती थी कि घर का गुजारा चल सके।
अगर इतने पैसे खर्च कर गांव में कोई कारोबार किया होता तो आज यह दिन न देखना पड़ता। मंदीप सिंह ने मान सरकार से मांग की है कि अन्य पंजाबी मेरे जैसे उजाड़े का शिकार न हों, इसके लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। साथ ही पंजाब को गैंगस्टरों से मुक्त बनाया जाए।
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