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नोएडा में फर्जी हेल्‍थ स्‍कीम कार्ड से लाखों का बीमा वसूलने का गोरखधंधा, 4 गिरफ्तार अस्‍पतालों में सेटिंग का तगड़ा खेल

RGANews Noida Delhi

Noida Crime: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़ कर महिला सहित चार लोगों को अरेस्‍ट किया है। ये लोग फर्जी कागजों के सहारे बीमा क्‍लेम करते थे।

ग्रेटर नोएडा: ग्रेनो वेस्ट की बिसरख थाना पुलिस ने एक्स सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ - स्कीम (ECHS) का फर्जी कार्ड बनाकर अस्पताल में इलाज करा लाखों रुपये का क्लेम लेने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन, वॉट्सऐप के माध्यम से इस्तेमाल किया गया फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं।

एडीसीपी सेंट्रल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में गाजियाबाद निवासी शिखा सिंह (25) और उसका भाई यश सिंह (20), फिरोजाबाद निवासी जितेंद्र यादव (31) और बुलंदशहर निवासी दानिश खान (22) शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर पीड़ित की बेटी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर शिखा की बहन तनु का इलाज कराया और करीब 6.5 लाख रुपये का अवैध लाभ उठाया। आरोपी ने कम खर्च में इलाज कराने का झांसा दिया
शिखा की बहन तनु लंबे समय से थी बीमार

जांच में सामने आया कि तनु लंबे समय से बीमार थी और आर्थिक तंगी के चलते उसका इलाज नहीं हो पा रहा । इसी दौरान शिखा को एक परिचित, जो बुलंदशहर के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत है, उसने दानिश खान से संपर्क कराया। दानिश ने कम खर्च में इलाज कराने का झांसा दिया और वॉट्सऐप के जरिए फर्जी ECHS कार्ड व आधार कार्ड उपलब्ध करा दिया। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को तनु को पीड़ित की बेटी के नाम से अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 5 अगस्त 2025 को उसकी मौत हो गई।
जीवित बेटी के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया

आरोप है कि इसके बाद भी आरोपियों ने फर्जीवाड़ा जारी रखा और मृतका का शव भी उसी फर्जी नाम से लिया। इतना ही नहीं, पीड़ित की जीवित बेटी के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तक तैयार कर प्रस्तुत कर दिया गया। पूछताछ में मुख्य आरोपी दानिश खान ने बताया कि वह अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर पिछले करीब दो वर्षों से इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा था। दोनों ऐसे मरीजों को तलाशते थे, जो इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराकर क्लेम दिलवाते थे। इसके बदले में मोटी रकम वसूलते थे।
पहले भी जा चुके हैं जेल

पुलिस के मुताबिक, दानिश और उसका साथी पहले भी थाना फेज-2 नोएडा से इसी तरह के मामले में जेल जा चुके है, लेकिन बाहर आने के बाद फिर से इस धंधे में लग गए। फिलहाल फरार आरोपी प्रदीप की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है।
गरीब मरीजों को ऐसे फंसाते थे

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे लोगों की तलाश के लिए तमाम सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों से बात करते थे। इसके बाद उन्हें अपने जाल में फंसते थे। इसके बाद उन्हें लालच देकर फर्जी नाम और दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया जात था। उनसे कहा जाता था कि जैसा भी कहें वैसे करते रहना। कुछ रुपये का लालच ऐसे लोगों को देकर बाकी रकम खुद हड़प जाते थे।
अस्पतालों के साथ भी रखते हैं साठगांठ

गिरोह का मास्टरमाइंड दानिश खान और उसका साथी प्रदीप बताया जा रहा है, जो फर्जी ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का इंतजाम करते थे। अस्पतालों में अपनी सेटिंग के चलते ये बिना मूल दस्तावेजों की जांच के मरीजों को भर्ती करा देते थे। दानिश ने पूछताछ में बताया कि वह और उसका साथी प्रदीप पिछले दो वर्षों से इस तरह की ठगी कर रहे है।

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