बरेली:11.18 करोड़ का स्काई वॉक बना कबाड़! 3 साल बाद भी बंद, टेंडर में फंसा मामला,निगम मौन
बरेली का स्काई वॉक बना ‘शोपीस’ — करोड़ों खर्च, जनता को नहीं मिला फायदा
टेंडर के जाल में फंसा स्काई वॉक: जंग खा रही करोड़ों की परियोजना
प्लानिंग की कमी या लापरवाही? 3 साल से बंद पड़ा बरेली का स्काई वॉक
3 साल में भी शुरू नहीं हुआ स्काई वॉक, करोड़ों की लागत पर उठे सवाल
RGANews अवधेश शर्मा उप संपादक
बरेली: बरेली में 11.18 करोड़ रुपये की लागत से बना स्काई वॉक आज भी जनता के लिए बंद पड़ा है। निर्माण पूरा हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो सका। हालात ऐसे हैं कि अब यह स्काई वॉक धीरे-धीरे जंग खाकर बेकार होता जा रहा है।
नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया बार-बार अटकने के कारण यह प्रोजेक्ट सिर्फ दिखावे की चीज बनकर रह गया है, जिससे शहरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
नगर निगम का दावा: जल्द शुरू होगा स्काई वॉक
नगर आयुक्त संजीव मौर्य के अनुसार, पटेल चौक स्थित स्काई वॉक को चालू करने के लिए कई बार टेंडर निकाले गए। एक कंपनी ने प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उसमें दुकानों के संचालन का स्पष्ट प्लान नहीं था, इसलिए उसे खारिज कर दिया गया।
अब नगर निगम दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर जल्द ही इस प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा।
विपक्ष का हमला: “बिना प्लानिंग के बनाया गया प्रोजेक्ट”
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और नगर निगम पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के नेता मयंक मोंटी शुक्ला का आरोप है कि यह परियोजना बिना ठोस योजना के शुरू की गई थी।
उनका कहना है कि
स्थानीय लोगों और व्यापारियों से कोई राय नहीं ली गई
कई कंपनियां आईं, लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई
अब स्काई वॉक की संरचना पर जंग लगने लगी है
जनता की परेशानी, फायदा शून्य…….
सियासी मंच के प्रमुख वसीम मियां ने कहा कि स्काई वॉक निर्माण के दौरान शहरवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन आज तक इसका कोई लाभ नहीं मिला।
उनके मुताबिक:
3–4 साल बीतने के बाद भी संचालन शुरू नहीं हुआ
यह परियोजना जनता के पैसे की बर्बादी बन गई
सही प्लानिंग की कमी साफ नजर आती है
अन्य परियोजनाओं का भी यही हाल?
नगर आयुक्त ने बताया कि संजय कम्युनिटी सेंटर के पास बना अमृत सरोवर तो तैयार है, लेकिन उसके संचालन के लिए भी टेंडर प्रक्रिया अटकी हुई है।
वहीं, शहर में लगाए गए कचरा कंटेनरों की हालत भी कई जगह खराब है, जिन्हें सुधारने का काम जारी है।
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