Vinayak Chaturthi 2024: विनायक चतुर्थी की पूजा में जरूर करें गणेश जी की आरती, मिलेगा पूर्ण फल
हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है और उनके निमित्त व्रत किया जाता है। ऐसे में आपको इस तिथि पर गणेश जी की पूजा के दौरान आरती का पाठ भी जरूर करना चाहिए ताकि आपके ऊपर गणपत्ति बप्पा की कृपा बनी रहे।
हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूजनीय देव के रूप में पूजा जाता है। चतुर्थी तिथि पर विशेष रूप से गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। ऐसे में मार्गशीर्ष माह की विनायक चतुर्थी का व्रत गुरुवार 05 अक्टूबर को किया जाएगा।
महाकुंभ में उमड़े नागाओं का रहस्य! सात घरों में भिक्षा मांगने की छूट, वरना… एमटेक और पीएचडी डिग्री होल्डर भी बने नागा
नागा संन्यासी अखाड़ों के योद्धा होते हैं जो जरूरत पड़ने पर मरने-मारने में पीछे नहीं रहते। नागा संन्यासी बनने के लिए शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट व धर्म के प्रति कुछ कर दिखाने की अदम्य इच्छाशक्ति होना जरूरी है। नागा संन्यासी को 24 घंटे में एक बार सात्विक भोजन करना होता है। सिर्फ सात घरों में भिक्षा मांगने की छूट है।
साल 2025 में कब मनाई जाएगी होली? एक क्लिक में जानें सही डेट और मुहूर्त
हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है जिसका इंतजार लोग पूरे साल बेसब्री से करते हैं। इस दिन लोग भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा करते हैं। कहते हैं इस मौके पर राधा-कृष्ण की पूजा से घर में खुशहाली आती है तो चलिए इसकी सही डेट जानते हैं।
Somvati Amavasya 2024: कब है साल की अंतिम अमावस्या? नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
पौष माह की अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार हर महीने में अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के संग पितरों की उपासना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस बार पौष माह में सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी।
Somwar Ke Upay: सोमवार के दिन इन चीजों से करें भगवान शिव का अभिषेक, आर्थिक तंगी होगी दूर
देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार है। महादेव के चरणों में रहने वाले साधकों को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही मृत्यु उपरांत भव सागर से बेड़ा पार होता है। साधक श्रद्धा भाव से सोमवार के दिन देवों के देव महादेव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा करते हैं।
Vinayak Chaturthi 2024: 4 या 5 दिसंबर, कब है विनायक चतुर्थी? यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी का व्रत विधिपूर्वक किया जाता है। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जाता है। इस वर्ष विनायक चतुर्थी की डेट को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बन रही है। चलिए इस लेख में हम आपको बताएंगे कि विनायक चतुर्थी व्रत की सही डेट।
माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए खुशखबरी! श्रद्धालुओं के लिए बना नया प्रतीक्षालय; मिलेंगी खास सुविधाएं
मां वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए एक नया प्रतीक्षालय का निर्माण हुआ है। इस प्रतीक्षालय में यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। इस प्रतीक्षालय में डिजिटल स्क्रीन पर श्रद्धालुओं को माँ वैष्णो देवी के लाइव दर्शन भी किए जा सकते हैं। यह नया प्रतीक्षालय श्रद्धालुओं की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।
आज है Kaal Bhairav Jayanti 2024, एक क्लिक में जानें पूजन विधि और प्रिय भोग, पुष्प से लेकर सब कुछ
काल भैरव जयंती का दिन बहुत ही खास होता है। इस दिन साधक पूजा-पाठ और उपवास रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि भैरव बाबा बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं इसलिए उनकी पूजा भक्तों को अवश्य करनी चाहिए। इस साल काल भैरव जयंती 22 नवंबर 2024 यानी आज मनाई जा रही है तो चलिए इस दिन की सही पूजन विधि जानते हैं।
MahaKumbh 2025: नागा संन्यासियों की इन 15 तस्वीरों से नहीं हटा पाएंगे नजर! संगमनगरी में हुआ जोरदार स्वागत
महाकुंभ के दिव्य-भव्य आयोजन के लिए संगम की रेती पर बसाई जा रही तंबुओं नगरी में जलापूर्ति के लिए लगभग 1249 किमी की पाइप लाइन बिछाई जा रही है। सीएम योगी के निर्देशों पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण और प्रदेश के सभी प्रमुख विभाग युद्धस्तर पर विकास कार्य में लगे हुए हैं। वहीं प्रयागराज में नागा सन्यासियों का आगमन शुरू हो चुका है।
वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी!, 6 मिनट में कटड़ा से पहुंचेंगे सांझीछत; रोपवे परियोजना को मिली मंजूरी
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कटड़ा से सांझीछत तक रोपवे परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी खासकर बुजुर्ग दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों को। केबल कार में सवार होकर श्रद्धालु मात्र 6-8 मिनट में ताराकोट से सांझीछत तक पहुंच सकेंगे। यह परियोजना करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से दो साल में पूरी होगी।