लखनऊ में एटीएस-एनआईए कोर्ट ने अवैध मतांतरण और विदेशी फंडिंग के मामले में 16 दोषियों को सजा सुनाई है। मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया के संचालक मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 12 दोषियों को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा मिली है। चार दोषियों को 10 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
लखनऊ। अवैध रूप से मतांतरण और विदेशी फंडिंग के मामले में एटीएस एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने बुधवार को मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया के संचालक मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 12 दोषियों को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा चार दोषियों को 10 वर्ष का कठोर कारावास दिया गया है। उन पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
एटीएस-एनआईए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। मंगलवार को इस प्रकरण में विशेष न्यायाधीश ने मौलाना कलीम समेत 16 को दोषी पाया था। तय आरोपों के आधार पर बुधवार को दोषियों को सजा सुनाई गई।
इन दोषियों को हुई सजा
विशेष न्यायाधीश ने मौलाना कलीम सिद्दीकी, कौसर आलम, डाॅ. फराज बाबुल्ला शाह, प्रसाद रामेश्वर कोवरे उर्फ आदम, भूप्रिय बंदो उर्फ अर्सलान मुस्तफा, मो. उमर गौतम, मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी, इरफान शेख उर्फ इरफान खान, सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेख, धीरज गोविंद राव जगताप, सरफराज अली जाफरी व अब्दुल्ला उमर को धारा 121 ए भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अलावा, राहुल भोला, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मो. सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ को धारा 123 भारतीय दंड संहिता के तहत 10 वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
आईएसआई और विदेशी संस्थाओं से पाते थे फंडिंग
एटीएस के लोक अभियोजक एमके सिंह ने बताया कि एटीएस ने 20 जून 2021 को मौलाना कलीम सिद्दीकी व अन्य आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। मौलाना और उसके साथियों के विरुद्ध लखनऊ स्थित एटीएस-एनआईए की खंडपीठ में मुकदमा चला। इतना ही नहीं, नोएडा के मूकबधिर स्कूल के बच्चों को भी गायब करने की बात सामने आई थी।
दरअसल, एटीएस को सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ लोग देश विरोधी, धार्मिक संगठन, आइएसआइ और विदेशी संस्थाओं से प्राप्त फंडिंग के आधार पर बड़े पैमाने में लोगों का मतांतरण कर देश में जनसंख्या संतुलन को तेजी से बदल रहे हैं।
मतांतरण कराए गए लोगों में उनके धर्म के प्रति नफरत पैदा कर रहे हैं। ये लोग सुनियोजित ढंग से लोगों को फंसाते थे। इनके निशाने पर बच्चों, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा मूक बधिर रहते थे।
जांच में यह भी उजागर हुआ था कि नई दिल्ली के बाटला हाउस निवासी मौलाना मोहम्मद उमर गौतम पहले स्वयं हिंदू था। बाद में वह मतांतरण कर मुस्लिम बन गया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर करीब एक हजार गैर मुस्लिमों को मुस्लिम धर्म में परिवर्तित कराया और बड़ी संख्या में उनका निकाह भी कराया।
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