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बरेली समाचार

बरेली: बिजली विभाग में पारदर्शिता और ईमानदारी के दावे एक बार फिर कागजों तक सिमट गए हैं। उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में रिवीजन के नाम पर करोड़ों के खेल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे साफ होता गया कि इस पूरे नेटवर्क की कमान शहर के एक तत्कालीन अधिशासी अभियंता के हाथ में थी, जिसे बाद में आए एक अन्य अधिशासी अभियंता ने पूरी रफ्तार दे दी।

सूत्रों के मुताबिक, इस खेल का तरीका बेहद शातिर था। उपभोक्ताओं से पूरा बकाया बिल नकद या सीधे जमा करवा लिया जाता था, फिर विभागीय ऑनलाइन पोर्टल पर बिल को रिवाइज कर नाममात्र की रकम दिखा दी जाती थी। उपभोक्ता को समझाया जाता कि आपका भी फायदा, हमारा भी जबकि असल में नुकसान बिजली विभाग को होता रहा। यह खेल एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक विभागीय बाबू की मिलीभगत से लंबे समय तक बेरोकटोक चलता रहा।

144 मामलों में हेराफेरी, 67 लाख से ज्यादा की राजस्व चोरी

जांच के शुरुआती चरण में ही 144 बिजली बिलों में गड़बड़ी पकड़ी गई, जिनमें 67,02,408 रुपये की रकम घटाई गई थी। इनमें से शुरुआती कार्यकाल से जुड़े मामलों में लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आई, जबकि बाद के कार्यकाल में यह संख्या और तेजी से बढ़ी। विभागीय सूत्रों का दावा है कि अगर पूरी अवधि की गहन जांच हुई तो आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।

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