दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूपीएससी द्वारा एक अभ्यर्थी को केवल पुरानी तारीख का जाति प्रमाण पत्र अपलोड करने के कारण सीआरपीएफ भर्ती प्रक्रिया से बाहर करने पर नाराजगी जताई। अदालत ने उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया में अस्थायी रूप से भाग लेने की अनुमति दी क्योंकि उसके पास निर्धारित अवधि के दौरान जारी प्रमाण पत्र था। अदालत ने यूपीएससी के तर्क को खारिज कर दिया।
नई दिल्ली। महज पूर्व की तारीख का जाति प्रमाण पत्र अपलोड करने के कारण एक अभ्यर्थी को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआरपीएफ) में भर्ती प्रक्रिया से बाहर करने पर हाईकोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के प्रति नाखुशी व्यक्त की है।
अदालत ने कहा कि पूर्व में भी एक अंतरिम आदेश पारित कर ऐसे उम्मीदवारों को भी राहत दी है जिनके पास संबंधित अवधि के दौरान जारी कोई प्रमाणपत्र नहीं था।
न्यायमूर्ति सी हरिशंकर व न्यायमूर्ति अजय दिगपाल की पीठ ने कहा कि अदालत को समझ नहीं आता कि पहले की तारीख का प्रमाण पत्र अपलोड किए जाने का तर्क यूपीएससी कैसे दे सकता है।
आवेदक ने गलती से अपलोड किया था पुराना सर्टिफिकेट
याचिका के अनुसार यूपीएससी ने गैर-क्रीमी लेयर ओबीसी श्रेणी के अभ्यर्थियों से एक अप्रैल 2024 और 14 मई 2024 के बीच जारी ओबीसी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा था।
याचिकाकर्ता के पास 30 अप्रैल 2024 को जारी ओबीसी प्रमाण पत्र था, लेकिन उसने गलती से 16 जनवरी 2024 को जारी किया गया एक पुराना प्रमाण पत्र अपलोड कर दिया था।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास वास्तव में 30 अप्रैल 2024 को उक्त विंडो अवधि के दौरान जारी किया गया ओबीसी प्रमाणपत्र था। यूपीएससी ने तर्क दिया कि संबंधित अवधि के दौरान न जारी होने वाले प्रमाणपत्र को अपलोड करने के बाद याचिकाकर्ता लाभ नहीं मिल सकता।
हालांकि, यूपीएससी के तर्कों को ठुकराते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को चयन प्रक्रिया में अस्थायी रूप से भाग लेने की अनुमति दे दी।
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