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जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों में काफी बैचेनी देखने को मिल रही है। उनके इस्तीफे को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन तत्काल प्रभाव से इसे स्वीकार किए जाने की जानकारी ने सभी को चौंका दिया। सदन में उनके इस्तीफे के कारणों पर चर्चा हुई। धनखड़ का इस्तीफा कैसे मंजूर हुआ और किस फैक्टर ने किया काम? जानिए

उपराष्ट्रपति पद से भले ही जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने की बात कही है लेकिन मंगलवार को जब उनके इस्तीफे की खबर के साथ राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सदन के भीतर मौजूद सदस्यों के चेहरे पर मायूसी के साथ कुछ सवाल भी तैरते दिखे।

जो सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले और स्थगित होने के बाद एक-दूसरे की सीटों के पास जाकर चर्चा के रूप में दिखाई दिए

धनखड़ के इस्तीफे ने सबको चौंकाया

इस दौरान उनके इस्तीफे को स्वीकार करने और न करने को लेकर अटकलें भी लगाई गई, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने के घंटे भर में तत्काल प्रभाव से उनके इस्तीफे को स्वीकार किए जाने की जानकारी ने और चौंका दिय

धनखड़ ने क्यों दिया इस्तीफा?

धनखड़ के इस्तीफे के पीछे के कारणों को बूझने में विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के सदस्य भी व्यस्त दिखे। हुआ यह कि मंगलवार को ग्यारह बजे जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, उपसभापति हरिवंश ने सदन को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से अवगत कराया

धनखड़ के इस्तीफे को लेकर सवाल

वैसे तो धनखड़ ने अपना इस्तीफा सोमवार देर रात ही दे दिया था। इसके पीछे मंशा यह थी कि सदन में इस्तीफे को लेकर कोई सवाल पूछे इससे पहले ही सदन को अवगत करा दिया जाए। इसके बाद तो बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर नियम 267 के तहत चर्चा कराने को मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

इस्तीफे पर लग रही अटकलों पर विराम

दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन फिर बैठा तो पीठासीन अधिकारी के रूप में घनश्याम तिवाडी आए और उन्होंने सदन को धनखड़ के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार किए जाने की जानकारी दी। इसके साथ उनके इस्तीफे पर लग रही अटकलों पर भी विराम लग गया।

  • राज्यसभा के सदस्यों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की थी कि सोमवार को तो वह सदन की कार्यवाही संचालित करते हुए पूरी तरह से ठीक थे।
  • इतना ही नहीं, उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के साथ कई दौर सदन के संचालन के मुद्दे पर चर्चा भी की।

सब कुछ 5 बजे के बाद हुआ?

इस दौरान किसी को उनके इस्तीफे की भनक नहीं लगी। शाम करीब पांच बजे की बैठक में भी जब नेता सदन जेपी नड्डा व संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू नहीं आए तो बैठक को अगले दिन दोपहर एक बजे तक के लिए टाल दिया था।

  • माना जा रहा है कि यदि उस समय तक उनकी ओर से इस्तीफा देने जैसी कोई बात होती तो वह मंगलवार को बैठक के लिए समय क्यों देते।
  • यदि स्वास्थ्य ठीक नहीं था तो वह छुट्टी पर भी जा सकते है। चर्चा यह भी है कि जो कुछ घटित हुआ था वह पांच बजे के बाद हुआ।