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उधमपुर में सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे शहर में कचरे का ढेर लग गया है। अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने जैसी मांगों को लेकर कर्मचारी अड़े हुए हैं। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उधमपुर। अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले ही अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने व अन्य कई लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर नगर परिषद उधमपुर के सफाई कर्मचारियों ने रविवार से हड़ताल शुरू कर दी। रविवार को सफाई कर्मचारियों ने काम नहीं किया और शहर के विभिन्न हिस्सों में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि अब जब तक सरकार हमारी लंबित मांगों को पूरा नहीं करेगी तब तक हम इसी तरह से हड़ताल को जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि शुक्रवार को सफाई कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करके 28 जून शनिवार से हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार से बातचीत के जरिए हल निकलने की उम्मीद में सफाई कर्मचारियों ने शनिवार को हड़ताल नहीं की। लेकिन जब शनिवार को दिन भी हड़ताल को लेकर सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं हुई तो रविवार को सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी।

उधमपुर शहर के साथ ही रामनगर व चनैनी नगर पालिकाओं में भी हड़ताल को शुरू कर दिया गया है। सफाई कर्मचारियों ने दिन भर कचरा उठाने का काम नहीं किया। इस कारण सुबह के समय शहर के सलाथिया चौक, बाड़यां, शक्तिनगर, सैला तालाब, वीनस चौक शहर के विभिन्न हिस्सों में दोपहर तक कचरे के ढेर लगे रहे और शहरवासी परेशान होते रहे

वहीं नगर परिषद के अधिकारियों को इसका पता चला तो डोर टू डोर कचरा उठाने वाले कंपनी के कर्मचारियों की मदद से शहर के कुछ हिस्सों से कचरा उठा दिया गया। इससे शहरवासियों को थोड़ी राहत मिली।

अर्बन लोकल बॉडी सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अशोक कुमार, पप्पू, युसुफ, मोहम्मद शरीफ व अन्य सफाई कर्मचारियों ने कहा कि अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने व अन्य लंबित मांगों को लेकर हमारी यूनियन ने पूरे जम्मू-कश्मीर में 26 अक्तूबर 2024 से 16 नवंबर 2024 तक हड़ताल की थी।

17 नवंबर को हमें प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि एक महीने के अंदर आपकी मांगों को पूरा कर दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हमने हड़ताल खत्म कर काम शुरू कर दिया था। लेकिन आठ महीने गुजरने के बाद भी हमारी एक भी मांग को पूरा नहीं किया है।

अब हमें जानकारी मिली है कि अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने वाली हमारी फाइल को सचिवालय में नामंजूर कर दिया है और इसी कारण अब हम एक बार फिर से हड़ताल शुरू करने को मजबूर हो जाएंगे।

सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगे

सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांग अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने की है। नगर परिषद व नगर पालिकाओं में सफाई कर्मचारी 15 वर्ष से भी अधिक समय से अस्थायी कर्मचारी बन कर कम वेतन पर काम कर रहे हैं और इससे इनको परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी मांग पुरानी पेंशन योजना लागू करने की है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना से हमारा भविष्य सुरक्षित नहीं है। इसमें हमें पेंशन की सुविधा से वंचित रखा गया है। इसलिए जल्द से जल्द पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाए।

तीसरी मांग सफाइ्र कर्मचारियों की कमी पूरा करने के लिए नए सफाई कर्मचारी नियुक्त किए जाए। मौजूदा समय में हर नगर परिषद व नगर पालिका में कम सफाई कर्मचारी रखे गए हैं और इससे काम कर रहे कर्मचारी पर दुगना बोझ डाला गया है।

चौथी मांग कॉन्ट्रेक्टर पर सफाई कर्मचारी नियुक्त करने पर रोक लगाने की है। कई नगर परिषद व नगर पालिकाओं में कॉन्ट्रेक्ट पर सफाई कर्मचारी नियुक्त कर काम चलाया जा रहा है और इससे कई लोग रोजगार से वंचित हो रहे हैं।

शहर से हर रोज निकलता है 20 से 25 टन कचरा

उधमपुर से हर रोज 20 से 25 टन कचरा निकलता है और इसको नगर परिषद के सफाई कर्मचारी शहर से बाहर ले जाते है। हड़ताल शुरू होने के बाद अब यह कचरा शहर के अंदर ही जमा होगा। जैसे जैसे हड़ताल बढ़ती जाएगी तो शहर के अंदर कचरे के ढेर भी बढ़ेंगे और इससे शहरवासियों के साथ ही बाजार खरीदारी करने के लिए आने वाले लोग भी परेशान होंगे।

हड़ताल के बीच डोर टू डोर कचरा उठाने काम रहेगा जारी

नगर परिषद की तरफ से डोर टू डोर कचरा उठाने का टेंडर जारी कर दिया है और करीब दो महीने से कंपनी के कर्मचारी घरों से कचरा उठाने का काम भी कर रही हैं। नगर परिषद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद कंपनी के कर्मचारी घरों से कचरा उठाने का काम करेंगे।

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