प्रयागराज में गंगा, यमुना सहित दस नदियों में जुलाई और अगस्त माह के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम मछलियों के प्रजनन को बढ़ावा देने और मत्स्य पालन को विकसित करने के लिए उठाया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी इस आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी हो सकती है। इसकी निगरानी के लिए टीमें गठित की गई हैं।
प्रयागराज। जनपद में गंगा और यमुना समेत 10 छोटी-बड़ी नदियों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ के निर्देश पर एडीएम प्रशासन की ओर से इसके लिए निर्देश जारी किए गए हैं। जुलाई और अगस्त माह में प्रजनन अवधि तक नदियों से मछलियां न निकालने का निर्णय लिया गया है। इन नदियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने लेकर यह कदम उठाया गया है। इसके उल्लंघन पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
गंगा और यमुना के साथ ही टोंस, बेलन, टुड़ियारी, नैना, गोरमा, लपरी, वरुणा व ससुर खदेरी नदी में अगस्त माह तक यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। मछली निकालते हुए पकड़े जाने पर मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तारी भी कराई जा सकती है। इसकी निगरानी के लिए मत्स्य पालन विभाग की ओर से छह टीमें गठित की गई हैं।
साथ ही नदियों के किनारे के गांवों में तैनात लेखपालों, ग्राम विकास अधिकारियों, बीट के सिपाहियों को भी इस पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैैं। प्रयागराज में इन नदियों से लगभग 1400 टन मछली हर माह पकड़ी जाती है। इसी तरह तालाबों से हर माह 1200 टन मछली निकाली जाती हैैं।
प्रयागराज परिक्षेत्र में गंगा, यमुना और टोंस नदी में कई खास तरह की मछलियां मिलती हैैं। गंगा की परियासी, हिल्सा, बैकरी, सूती, टेंगार तो यमुना की गेगरा मछली की काफी मांग रहती है। यहां से पूर्वांचल व बुंदेलखंड के कई जिलों के साथ ही बंगाल और असोम तक मछली भेजी जाती है। आंध्र प्रदेश व तेलांगाना से कुछ विशेष किस्म की मछलियां मंगाई भी जाती हैं।
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