Skip to main content

बरेली: DIG अजय कुमार साहनी की मौजूदगी में रुहेलखंड विश्वविद्यालय में न्यायालयीय कार्यों पर रिफ्रेशर कोर्स आयोजित

बरेली समाचार

बरेली। बदलते आपराधिक कानूनों और तकनीकी न्याय प्रणाली के दौर में शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम पुलिस प्रशिक्षण का केंद्र बन गया। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर आयोजित एक दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स में बरेली जोन के नौ जनपदों के 181 थानों से जुड़े पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में विधिक दक्षता, अभिलेखों की शुचिता और डिजिटल पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन के इस समन्वय को ज्ञान और कानून व्यवस्था के सशक्त संगम की संज्ञा दी।

नए आपराधिक कानूनों पर विशेष प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में संयुक्त निदेशक (अभियोजन) अच्छेलाल यादव ने तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
भारतीय साक्ष्य अधिनियम
के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों की भूमिका को आपराधिक न्याय प्रणाली की धुरी बताते हुए अभियोजन को मजबूत करने पर बल दिया।

डिजिटल साक्ष्य, ई-समन और ट्रैकिंग सिस्टम पर जोर
द्वितीय एवं तृतीय सत्र में उच्चतम न्यायालय और उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों की समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) के.के. शुक्ल ने चेन ऑफ कस्टडी, रिमांड प्रक्रिया, साक्ष्य प्रस्तुतिकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।

इस दौरान पुलिस विभाग में उपयोग हो रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म ICJS CCTNS e-Malkhana NSTEPपर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें मैदानी स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई।

आपको बता दे आज 780 पुलिस कर्मियों ने लिया भाग कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन रमित शर्मा, पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र अजय कुमार साहनी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इस रिफ्रेशर कोर्स में कुल 780 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 709 थाना पैरोकार, कोर्ट मोहर्रिर, मॉनिटरिंग सेल प्रभारी और 71 अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे। मुरादाबाद परिक्षेत्र के डीआईजी मुनीराज सहित अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

डिजिटल दक्षता से मजबूत होगा अभियोजन
कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि यदि डिजिटल साक्ष्य की चेन मजबूत और पारदर्शी होगी तो अपराधी कानून से बच नहीं पाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि विधिक दक्षता, अनुशासन और तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि बदलती आपराधिक संरचना के अनुरूप पुलिस तंत्र को अपडेट करने की ठोस पहल साबित हुआ।