बरेली: बरेली शहर के प्राचीन और प्रतिष्ठित शिवालयों में गिने जाने वाला त्रिवटी नाथ मंदिर आज भी अपनी दिव्यता और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। शहर के मध्य स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनूठी स्थापना कथा के कारण भी विशेष पहचान रखता है।
स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग की मान्यता
मंदिर को लेकर प्रचलित मान्यता के अनुसार कई सौ वर्ष पूर्व एक व्यक्ति को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए। स्वप्न में संकेत मिला कि जिस स्थान पर वह विश्राम करता है, उसके नीचे एक शिवलिंग विराजमान है। जब उसने यह बात लोगों को बताई और उस स्थान की खुदाई कराई गई, तो सचमुच वहां से शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद यहां भव्य मंदिर की स्थापना की गई और तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
तीन बरगद के वृक्षों के बीच स्थित दिव्य धाम
‘त्रिवटी’ नाम भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर तीन विशाल बरगद के वृक्षों के मध्य स्थित है, जो इसकी पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण को और भी दिव्य बना देते हैं। बरगद के इन प्राचीन वृक्षों की छांव में स्थापित शिवलिंग भक्तों को अद्भुत शांति का अनुभव कराता है।
महाशिवरात्रि पर उमड़ती है अपार श्रद्धा
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तड़के से ही जलाभिषेक और पूजन-अर्चन का सिलसिला शुरू हो जाता है। बरेली जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि त्रिवटी नाथ में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है।
कांवड़ यात्रा में विशेष महत्व
कांवड़ यात्रा के दौरान भी इस मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यदि कांवड़ यात्रा के समय त्रिवटी नाथ मंदिर में जलाभिषेक न किया जाए तो यात्रा अधूरी मानी जाती है।
आस्था, इतिहास और चमत्कार का यह संगम त्रिवटी नाथ मंदिर को बरेली की धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बनाता है।
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