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 बरेली समाचार 

बरेली में फर्जी क्लीनिक का खुलासा, बच्चे की हालत बिगड़ी, आरोपी पर मुकदमा दर्ज
बरेली। झोलाछाप के खतरनाक और अमानवीय इलाज ने एक मासूम बच्चे की जान खतरे में डाल दी।

आंत की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे का झोलाछाप ने बिना किसी जांच-पड़ताल के अंडकोष का ऑपरेशन कर डाला।

गलत ऑपरेशन के चलते बच्चे को लगातार रक्तस्राव होता रहा और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

फर्जी क्लीनिक पर हुआ खतरनाक ऑपरेशन
मामला बारादरी थाना क्षेत्र का है। डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल अपने पुत्र अजय को पेट की समस्या के चलते सनराइज कॉलोनी के पास स्थित पृथ्वी फार्मा क्लीनिक लेकर गया।

वहां मौजूद झोलाछाप जयवीर ने बच्चे की आंत की बीमारी को नजरअंदाज करते हुए उसके निजी अंग में समस्या बताई और ऑपरेशन की सलाह दे डाली।

झोलाछाप ने खुद को अनुभवी बताकर भरोसा दिलाया कि वह ऐसे कई ऑपरेशन कर चुका है और चीरा लगाकर बच्चा ठीक हो जाएगा।

20 हजार लेकर किया अवैध ऑपरेशन आरोपी जयवीर ने 6 दिसंबर को ऑपरेशन के नाम पर 20 हजार रुपये वसूल लिए और बच्चे को कमरे में ले जाकर अंडकोष का ऑपरेशन कर दिया।

इसके बाद करीब 25 दिनों तक तीन बार टांके बदले गए और रोज पट्टी की गई। पट्टी के नाम पर 500 रुपये प्रतिदिन वसूले जाते रहे।

इस दौरान बच्चे को लगातार खून बहता रहा, लेकिन झोलाछाप इलाज जारी रखने का झांसा देता रहा।

पीजीआई लखनऊ में खुली पोल बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे पीजीआई लखनऊ लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्चे की असली समस्या आंत में है, जबकि उसका अंडकोष गलत तरीके से ऑपरेट कर दिया गया है।

डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही को देखते हुए बच्चे को भर्ती करने से भी इनकार कर दिया।

फर्जी निकला झोलाछाप, दी धमकी जांच में सामने आया कि जयवीर के पास कोई भी मेडिकल डिग्री या पंजीकरण नहीं है। पीड़ित पिता ने जब झोलाछाप से शिकायत की तो उसने फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दे दी।

थाने में दर्ज हुआ मुकदमा धमकियों से डरने के बजाय पीड़ित ने बारादरी थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी झोलाछाप जयवीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि शहर में खुलेआम झोलाछाप किसकी शह पर क्लीनिक चला रहे हैं और कब तक मासूम जिंदगियां ऐसे फर्जी डॉक्टरों की भेंट चढ़ती रहेंगी?