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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने INS उदयगिरि और INS हिमगिरि के कमीशनिंग पर कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करता है। INS उदयगिरी सूर्योदय का प्रतीक है जो नई ऊर्जा का संदेश देता है वहीं INS हिमगिरी हिमालय की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए सक्षम है। यह पोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करेगा।

नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने INS उदयगिरी और INS हिमगिरी की कमीशनिंग के मौके पर कहा कि दो युद्धपोतों की एक साथ कमीशनिंग हमारे आत्मनिर्भर भारत के सपने की साकार होती तस्वीर है। साथ ही हमारे विजन और कमिटमेंट का भी प्रमाण है। विशाखापट्टनम से INS Udaygiri और INS Himgiri की, जो यात्रा शुरू हो रही है, वह भारत के गौरव की यात्रा है। यह कमीशनिंग हम सबके लिए गर्व का विषय है।

रक्षामंत्री ने कहा कि यदि मैं INS उदयगिरी और INS हिमगिरी की बात करूं, तो इन युद्धपोतों के नाम भी अपने आप में प्रेरणा हैं। उदयगिरी, जो सूर्योदय का प्रतीक है, हमें यह याद दिलाता है कि हर नई सुबह नई ऊर्जा, नई चुनौतियां और नए अवसर लेकर आती है। वहीं दूसरी तरफ हिमगिरी, जो हिमालय की अडिग और अचल शक्ति का प्रतीक है, यह बताता है कि समुद्र की लहरों पर भी भारतीय नौसेना हिमालय की तरह ही अडिग है

हमारे पास तैरने वाला F-35

INS उदयगिरी और INS हिमगिरी की कमीशनिंग के मौके पर संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आपने स्वदेशी एफ-35 युद्धपोत की कमीशनिंग की है। एक देश के पास उड़ने वाला एफ-35 है और आपने तैरने वाला एफ-35 बनाया है, वह भी भारत में ही बना है।

रक्षामंत्री ने कहा कि आज सिर्फ भारतीय नौसेना की क्षमता में इजाफा नहीं है बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश भी है, कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है और किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है। हमारी नौसेना, भारत की समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक है। यह न केवल हमारे तटीय क्षेत्रों की रक्षा करती है, बल्कि इस बात को सुनिश्चित करती है, कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी शांति और संपन्नता रहे।

आईएनएस उदयगिरी और हिमगिरी का निर्माण

आईएनएस उदयगिरी का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है और यह नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया 100वां जहाज है। आईएनएस हिमगिरी, कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित किए जा रहे पी-17ए जहाजों में से पहला है।

हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भूमिका और समुद्री सुरक्षा

भारत के लिए मुख्य चुनौती चीन का बढ़ता समुद्री विस्तार है, जिसने हिंद महासागर में 'मोतियों की माला' (String of Pearls) नीति के तहत ग्वादर (पाकिस्तान), हंबनटोटा (श्रीलंका), चटगांव (बांग्लादेश) और जिबूती में अपनी पकड़ बना ली है। ऐसी स्थिति में, नीलगिरी श्रेणी के युद्धपोत भारत के लिए एक मजबूत निवारक के रूप में काम करेंगे।

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