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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारणों का पता लगाने के लिए गठित तथ्यान्वेषी समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। समिति ने जम्मू संभाग के सभी दस जिलों का दौरा कर उम्मीदवारों नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा की है। रिपोर्ट में हार के कारणों के साथ ही पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे।

जम्मू। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में हार के कारणों का पता लगाने के लिए तथ्यों का पता लगाने को बनी कमेटी ने रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। कमेटी ने जम्मू संभाग के सभी दस जिलों का दौरा कर उम्मीदवारों, नेताओं, कार्यकर्ताओं से चर्चा का कार्य पूरा कर लिया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया गया। रविंद्र शर्मा के नेतृत्व में कमेटी जहांगीर मीर, वेद महाजन, दीनानाथ भगत शामिल थे।

रिपोर्ट को करीब एक सप्ताह तक प्रदेश प्रधान तारिक हमीद करा को सौंपा जाएगा। पार्टी हाइकमान के निर्देश पर प्रदेश प्रधान ने कमेटी का गठन किया था जिसने जमीनी सतह पर जाकर कार्य किया। पार्टी उम्मीदवारों के हार के कारणों के अलावा मजबूती के लिए सुझाव भी लिए गए।

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव में जम्मू संभाग से कांग्रेस को मात्र एक ही सीट मिली थी, जबकि कुल छह सीटें ही मिली थीं। हालांकि पार्टी लंबे समय से जल्द चुनाव करवाने की मांग कर रही थी लेकिन जमीनी सतह पर आधार न होने के कारण करारी हार का सामना करना पड़ा।

39 सीटों पर लड़ा था चुनाव

कांग्रेस ने चुनाव पूर्व ही नेशनल कांफ्रेंस से गठबंधन किया था और 39 सीटों पर उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा जिसमें मात्र छह ही जीत पाए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता प्रचार के लिए पहुंचे लेकिन इसके बावजूद पूर्व प्रदेश प्रधान विकार रसूल, रमन भल्ला, चौधरी लाल सिंह, मनोहर लाल शर्मा, ताराचंद, मुलाराम समेत कई नेता चुनाव हार गए। इससे कांग्रेस को जबरदस्त झटका लगा था। कई नेता तो अभी तक हार से उभर नहीं पाए हैं।

रिपोर्ट में कमेटी सभी मुद्दों का जिक्र करेगी

सूत्र बताते हैं कि फीडबैक के दौरान हार के कारणों में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी, प्रचार का धीमा होना, उम्मीदवारों के चयन में गलतियां, भाजपा के दुष्प्रचार का जवाब देने में ढुलमुल रवैया, सिर्फ अपने ही विस क्षेत्रों पर ध्यान देकर पार्टी के लिए कुछ नहीं करना, प्रचार के लिए महज औपचारिकता पूरी करना, आदि कई कारण सामने आए हैं

गोपनीय रिपोर्ट में कमेटी सभी मुद्दों का जिक्र करेगी और पार्टी की मजबूती के लिए सुझाव भी देगी। कई अहम मुद्दों पर कांग्रेस का ढुलमुल रवैया भी हार का कारण बना है। पिछले दिनों प्रदेश प्रधान के साथ ब्लाक प्रधानों की बैठक में भी अधिकतर ने नेताओं के कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठाए थे।

प्रदेश प्रधान ने किसी नेता को शामिल न करते हुए अकेले में बैठक की थी। प्रदेश प्रधान इस समय नेताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए सक्रिय होकर काम कर रहे है क्योंकि आगे निकाय व पंचायत चुनाव होने वाले है लेकिन हारे हुए उम्मीदवारों जिसमें वरिष्ठ नेता अधिक है, के प्रयास अभी भी तेज नहीं हुए हैं।