तेजप्रताप यादव अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं और राजद के साथ उनके संबंध अनिश्चित बने हुए हैं। उन्हें एक सुरक्षित विधानसभा सीट की तलाश है और वे महुआ और हसनपुर दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं। राजद को तेजप्रताप से बगावत की आशंका है लेकिन पार्टी में उनकी वापसी या महागठबंधन में समर्थन का विकल्प खुला है।
पटना। तेजप्रताप यादव और राजद के साथ अभी दूरी और निकटता का अंतर्द्वंद्व है, क्योंकि दोनों अभी ऊहापोह में हैं। तेजप्रताप को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता है, जो राजद के सहयोग के बिना अधर में प्रतीत हो रहा है।
राजद को तेजप्रताप से बगावत की आशंका, जिसके कारण पिछले वर्षों में हल्की खरोंच लग चुकी है। इसीलिए दोनों ओर से अभी इतनी गुंजाइश छोड़ी जा रही कि साथ-बात हमेशा के लिए बेपटरी न हो जाए
जीत की गारंटी वाली सीट
तेजप्रताप को अभी एक ऐसे विधानसभा क्षेत्र की तलाश है, जहां से जीत की गारंटी हो। अभी तक की चुनावी स्थिति में किसी मजबूत गठबंधन के भीतर ही यह अभिलाषा पूरी हो सकती है। विधानसभा के पिछले दो चुनावों में वे क्रमश: महुआ और हसनपुर से विजयी रहे हैं
इस बार तय नहीं कर पा रहे कि कहां दांव आजमाएं, क्योंकि राजद से टिकट की अभी गारंटी नहीं। इसीलिए वे दोनों विधानसभा क्षेत्रों की परिक्रमा कर रहे। दोनों जगह अपने समर्थकों को ढांढस बंधा रहे, लेकिन प्रत्यक्षत: परिवार या पार्टी पर आक्षेप की कोई बात नहीं कर रहे।
तेजस्वी का है भविष्य
अलबत्ता अपना पुराना राग दोहरा रहे कि परिवार और पार्टी को कुछ ''जयचंदों'' ने अपने प्रभाव में ले लिया है। भविष्य तेजस्वी का है, जिनका सारथी बनकर वे चुनावी कुरुक्षेत्र में उनके विजय की कामना रखते हैं। इस पर राजद की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया का कारण भी नहीं।
अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि परिवार-पार्टी से निष्कासन का आशय यह नहीं होता कि संवाद समाप्त हो गया है। संवाद से हर समस्या का समाधान संभव है और तेजप्रताप पहले की अपेक्षा संतुलित संवाद कर रहे हैं। अलबत्ता उनके बदले हुए झंडे को वे यह कहते हुए नजरअंदाज कर जाते हैं कि मौके-बेमौके भेष बदलने के बावजूद तेजप्रताप आखिरकार राजनीति में ही तो हैं।
राजद के पास दो विकल्प
तेजप्रताप अगर बगावत-विरोध पर नहीं उतरे तो उनके लिए राजद के पास दो विकल्प हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा होने पर पार्टी में उनकी वापसी या फिर महागठबंधन में अपने खाते से किसी एक सीट पर प्रत्याशी नहीं देकर उनका मार्ग प्रशस्त कर देना।
बहरहाल, तेजप्रताप का मन महुआ पर अधिक है, जहां से वे 2015 में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। महुआ से अभी मुकेश कुमार रौशन राजद के विधायक हैं। लालू-तेजस्वी के प्रति निष्ठा के प्रदर्शन का वे कोई अवसर नहीं चूकते।
राजद में अगर तेजप्रताप की वापसी नहीं होती है तो महुआ में मुकेश की दावेदारी को दरकिनार करना सहज नहीं। तेजप्रताप अभी हसनपुर से ही विधायक हैं, इसीलिए अंदरखाने लालू-राबड़ी से वहां फोकस बढ़ाने का निर्देश है।
इस हिदायत के साथ कि 2019 की तरह किसी हरकत का परिणाम हितकर नहीं होगा। तब लोकसभा के चुनाव मेंं तेजप्रताप ने बगावत कर दिया था। जहानाबाद में उनके प्रत्याशी चंद्रप्रकाश को मिले 7755 मतों के कारण ही राजद की हार हो गई थी। यह राजद का मानना है। जीत-हार का निर्णय मात्र 1751 मतोंं के अंतर से हुआ था।
तेजप्रताप का चुनावी इतिहास
चुनावी वर्षसीटविजेता (दल)प्राप्त मतउप विजेता (दल)प्राप्त मत
2015
महुआ
तेजप्रताप (राजद)
66927
रविंद्र राय (हम)
38772
2020
हसनपुर
तेजप्रताप (राजद)
80991
राजकुमार राय (जदयू)
59852
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