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शहडोल के बाद अब सतना जिले के रामनगर जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। मूर्तिहाई ग्राम पंचायत में भवन निर्माण फर्म के नाम पर लड्डू काजू और नमकीन के बिल लगाए गए हैं। सरपंच ने इस गलती के लिए सचिव को जिम्मेदार ठहराया है। जनपद सीईओ ने जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।

रामनगर/सतना। शहडोल में पोताई और ड्राईफ्रूट के बिल सामने आने के बाद अब सतना में भी इसी तरह का कारनामा सामने आया है। रामनगर जनपद पंचायत की मूर्तिहाई ग्राम पंचायत में भवन निर्माण करने वाली फर्म के नाम पर लड्डू, काजू, किसमिस और नमकीन के बिल लगा दिए गए।

जो दो बिल पंचायत दर्पण पोर्टल में अपलोड किए गए हैं, उनमें एक में ईंट, रेत, गिट्टी और सीमेंट खरीदना बताया गया जबकि दूसरे में नमकीन, काजू-किसमिस, पानी की बोतल, चायपत्ती आदि की खरीदी दर्शाई गई है।

बताया जाता है कि यह फर्म भाजपा मंडल अध्यक्ष व सरपंच के पुत्र की है। सरपंच ने भी स्पष्टीकरण दिया है कि यह गलती सचिव से हुई है। पंचायत की ओर से नकद भुगतान किया गया, जबकि बिल इसी भवन निर्माण समग्री बेचने वाली फर्म से बनवा दिया गया। जनपद सीईओ ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

भ्रष्टाचार और मिलीभगत का नमूना

विधि ट्रेडर्स, मूर्तिहाई नामक फर्म से ग्राम पंचायत मूर्तिहाई ने रेत, गिट्टी, सीमेंट आदि खरीदी है। फर्म की ओर से गेट मरम्मत और पहुंच मार्ग की सफाई का बिल भी लगाया गया है। 27 फरवरी 2024 को लगाया गया यह बिल 44 हजार 875 रुपये का है।

वहीं, 22 तारीख (महीना अस्पष्ट) 2024 का दूसरा बिल भी इसी फर्म का है, जिससे 10 किलो लड्डू, पांच किलो नमकीन, 200 पैकेट बिस्टिक, 20 दर्जन केला, 10 किलो शक्कर, एक किलो चायपत्ती, चार किलो काजू, 500 ग्राम किसमिस, 200 नग पानी की बोतल, 200 नाश्ता प्लेट और 200 चाय के कप खरीदना दर्शाया गया है।

यह बिल 12 हजार 350 रुपये का है। यह सामग्री किस आयोजन के लिए खरीदी गए, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। दोनों बिलों में सरपंच डॉ. रामबली वैश्य और सचिव रामदेव वैश्य की सील और हस्ताक्षर भी हैं। बिल में प्रोप्राइटर के तौर पर संदीप कुमार बैस का नाम लिखा हुआ है।

सरपंच ने पुत्र की फर्म के सवाल का नहीं दिया जवाब

ग्राम पंचायत मूर्तिहाई के डॉ. रामबली वैश्य ने सफाई देते हुए कहा कि निर्माण सामग्री अवश्य मंगाई गई है, लेकिन नाश्ता नकद भुगतान करके मंगाया गया था। सचिव ने उसका बिल भी एक ही फर्म के नाम से लगा दिया जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है। जब उनसे यह फर्म उनके पुत्र की होने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने व्यस्त होने का हवाला देते हुए बाद में बात करने की बात कही।

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