हापुड़ में रेशमा नाम की एक महिला की दर्दनाक कहानी सामने आई है। पांच साल में दो शादियां करने वाली रेशमा ने एक हादसे में अपने पति और दोनों बेटियों को खो दिया। शराब की लत के कारण पहली शादी टूटने के बाद रेशमा ने दूसरी शादी की थी जिससे उसे खुशी मिली थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था।
हापुड़। जिंदगी की किताब में कुछ पन्ने ऐसे होते हैं, जो दर्द और त्रासदी की स्याही से लिखे जाते हैं। रेशमा की कहानी ऐसी ही एक दास्तान है, जो किसी हृदय विदारक कहानी से कम नहीं।
पांच साल में दो निकाह और अनगिनत सपनों के टूटने की इस कहानी में एक ही पल में पति और दोनों पुत्रियों को खोकर रेशमा की दुनिया उजड़ गई है।
उसका दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। शवों से लिपटकर वह बार-बार यही कह रही थी कि मेरी मायरा, मेरी समायरा, मेरा दानिश..सब को खुदा ने छीन लिया। अब मैं किसके लिए जिऊं?
इकलौती बेटी, सात भाइयों की लाडली
रेशमा के पिता सिराजुद्दीन की आंखों में अपनी बेटी का दुख देखकर आंसुओं का सैलाब है। उन्होंने बताया कि रेशमा उनकी और उनकी पत्नी गुलिस्ता बेगम की इकलौती पुत्री थी। उसके सात भाई सलाउद्दीन, शहजाद, सरफराज, शादाब, शाबाज, अरबाज और समीर अपनी इस बहन को जान से ज्यादा प्यार
रेशमा के लिए उनका घर किसी जन्नत से कम नहीं था। हर भाई उसकी छोटी-सी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
पहला निकाह और सपनों का टूटना
वर्ष 2010 में रेशमा की जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हुआ। दिल्ली के हौज रानी माली नगर के जावेद से उसका निकाह बड़ी धूमधाम से हुआ। सिराजुद्दीन ने अपनी बेटी की शादी में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
मगर, यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। जावेद की शराब की लत ने रेशमा की जिंदगी को नरक बना दिया। शराब के नशे में वह रेशमा के साथ मारपीट करता। रेशमा ने हिम्मत दिखाई और अपनी बेटी मायरा को जन्म दिया, लेकिन जावेद की यातनाएं कम नहीं हुईं।
आखिरकार, रेशमा ने हार मान ली और तलाक का रास्ता चुना। न्यायालय के जरिए दोनों का रिश्ता खत्म हुआ, और रेशमा अपनी बेटी मायरा के साथ मायके लौट आई।
दूसरा निकाह, उम्मीद की नई किरण
रेशमा की बेरंग जिंदगी को फिर से रंगों से भरने की कोशिश में सिराजुद्दीन ने वर्ष 2015 में उसका निकाह दानिश के साथ तय किया। दानिश की भी पहली पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी।
इस बार रेशमा को वह प्यार और सम्मान मिला। जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। दानिश ने उसे दिल से अपनाया। उनके घर में एक नन्ही परी समायरा ने जन्म लिया।
एक पल में उजड़ गई दुनिया
नियति का क्रूर खेल देखिए, जिस रेशमा ने अपने दुखों को पीछे छोड़कर एक नया संसार बसाया था। उसकी जिंदगी एक हादसे ने तहस-नहस कर दी। सात भाइयों की लाडली बहन आज इस कदर टूटी है कि कोई उसे सांत्वना भी नहीं दे पा रहा।
उसकी हालत को देखकर पड़ोसी, रिश्तेदार, और यहां तक कि अनजान लोग यही कह रहा थे कि खुदा इतना दुख तो कोई दुश्मन को भी न दे।
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